2022

आयुष डॉक्टर अभ्यर्थियों की शर्तिया भर्ती को आ रहे फोन – स्वास्थ्य विभाग व तकनीकी सेवा आयोग से की शिकायत

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शिकायत पत्र के अनुसार विज्ञापन संख्या – 5/2020 आयुष फिजिशियन (आयुर्वेद)

की काउसिलिंग में टेबुल नंबर – 16 से काउंसलर द्वारा काउसिलिंग के बाद अभ्यर्थी चिकित्सक

को मोबाइल नंबर 9308964772 से फोन कर रुपया मांगा गया था।

बिहार में आयुष चिकित्सकों की स्वास्थ्य विभाग में शर्तिया नियुक्ति को लेकर धंधेबाजों के सक्रिय होने का मामला उजागर हुआ है। कुछ अभ्यर्थियों को शर्तिया नियुक्ति कराने को लेकर फोन कॉल आने के बाद यह मामला सामने आया है। इस बाबत अभ्यर्थियों की ओर से स्वास्थ्य विभाग व तकनीकी सेवा आयोग से शिकायत भी की गई है।

शिकायत

● काउंसलर की गतिविधियों पर कुछ अभ्यर्थियों द्वारा संदेह जताया जा रहा

● अभ्यर्थी से मोबाइल नंबर 9308964772 से फोन कर रुपया मांगा गया था

अभ्यर्थियों की निर्धारित योग्यता में एक अंक का भी अंतर संभव नहीं है। अभ्यर्थियों की शिकायतों को लेकर बिहार तकनीकी सेवा आयोग के अध्यक्ष को उचित कार्रवाई के लिए कहा गया है।

प्रत्यय अमृत

अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग

24 फरवरी तक होनी है काउंसिलिंग

राज्य में 8 फरवरी से आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई और यह 24 फरवरी तक होनी है। काउसिलिंग के माध्यम से 3270 पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति होनी है।

गौर हो कि राज्य में आयुर्वेद, होमियोपैथी एवं यूनानी चिकित्सकों की स्थायी नियुक्ति को लेकर काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू है। आयुष मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन, बिहार की ओर बिहार तकनीकी सेवा आयोग के अध्यक्ष व स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर काउंसिलिंग के दौरान नंबर बढ़ाने को लेकर प्रलोभन दिए जाने की शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायत पत्र के अनुसार विज्ञापन संख्या – 5/2020 आयुष फिजिशियन (आयुर्वेद) की काउसिलिंग में टेबुल नंबर – 16 से काउंसलर द्वारा काउसिलिंग के बाद अभ्यर्थी चिकित्सक को मोबाइल नंबर 9308964772 से फोन कर रुपया मांगा गया था। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जयशंकर प्रसाद के अनुसार काउसिलिंग के बाद अभ्यर्थी डॉ. निधि श्री विभुति को कॉल किया गया एवं अनुभव हेतु 25 नंबर देने के लिए राशि की मांग की गयी। टेबुल नंबर-16 के काउंसलर की गतिविधियों पर कुछ अभ्यर्थियों द्वारा संदेह जताया जा रहा है। सही ढंग से प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं करना एवं अभ्यर्थी द्वारा अनुरोध किए जाने पर उनके द्वारा कहा जा रहा है ‘यह मेरा काम है, हम बाद में करेंगे। अभ्यर्थी काउंसलर से काउंसिलिंग प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं है। इस संबंध में आयोग द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि काउसिलिंग के दौरान कुछ टेबुल पर उन अभ्यर्थियों को भी अनुभव की मान्यता दी जा रही है जिन्होंने निजी ट्रस्ट, एनजीओ से चिकित्सा कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र दिया है। वहीं, विज्ञापन के बाद एमडी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी मान्यता दी जा रही है, जबकि बिहार के सरकारी अस्पतालों के कार्य अनुभव प्रमाण पत्र धारकों को प्रमुखता दी जानी है।

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