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मुजफ्फरपुर : आखिर क्यों 12 वर्षीय बच्ची के अपहरण केस में देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी सीबीआई सुप्रीम कोर्ट से मांगती जा रही है तारीख पर तारीख…?

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहनेवाली नवारुणा चक्रवर्ती का अपहरण

18 सितम्बर 2012 की रात उस समय हुआ जब वो अपने आवास में सो रही थी।

अवरूणा चक्रवर्ती के पिता का आरोप है कि सीबीआई दोषियों को बचाना चाहती है।

navruna caseदेश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई तीन साल से बिहार के मुजफ्फरपुर की एक 12 वर्षीय बच्ची नवारुणा चक्रवर्ती के अपहरण के मामले की जांच कर रही है लेकिन अब तक वो दोषियों को चिह्नित करने में ‘असफल’ रही है। स्थानीय जनता को लगने लगा है कि सीबीआई गुनहगारों को पकड़ना नहीं बल्कि बचाना चाहती है इसीलिए वो सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर जांच पूरा करने के नाम पर तारीख पर तारीख लेते जा रही है। 13 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को सितम्बर तक का समय दिया है।

गुम बच्ची के पिता के साथ-साथ शहर के शांति पसंद लोगों का तो स्पष्ट आरोप है कि सारी कवायत ताकतवर लोगों, जिनमें एक गिरोहबाज पुलिस आफिसर है, को बचाने के लिए की जा रही है। नवारुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में शहर के 11 लोगों पर अपनी पुत्री के अपहरण का आरोप लगाया है जिनमें इस पुलिस अधिकारी का भी नाम है।

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहनेवाली नवारुणा का अपहरण 18 सितम्बर 2012 की रात उस समय हुआ जब वो अपने आवास में सो रही थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि घर में तीन अपराधी घुसे, लड़की को बेहोश किया, बेडशीट में लपेटा और चलते बने। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार लड़की के पिता अतुल्य चक्रवर्ती के पास बड़ा मकान है, उसमें काफी जमीन है जिस पर लोकल भूमाफिया की बुरी नजर है। कुछ ही दिनों बाद पुलिस ने इस एंगल को क्लोज कर नई थियरी दी कि लड़की का किसी लड़के के साथ अफेयर था और दोनों भाग गए।

देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को उठाने लगे। सारा शहर पीड़ित परिवार के पक्ष में खड़ा हो गया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जुलूस व प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया। देश के तमाम संवैधानिक हस्तियों के पास न्याय पाने के लिए पत्राचार होने लगा। दबाव में आकर पुलिस दो डिप्टी एसपी और 8 पुलिसवालों को मिलाकर एक जांच टीम का गठन किया गया। अवरूणा के पिता कहते हैं, “इसका गठन दोषियों को बचाने के लिए किया गया था न कि उन्हे पकड़ने के लिए।”

पुलिस मामले को नहीं सुलझा रही थी तो इसकी गंभीरता देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की जिसे एजेंसी ने ठुकरा दिया। दिल्ली यूनिवर्सिटी में कानून के छात्र अभिषेक रंजन की पीआईएल (जनहित याचिका) पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर 2013 को सीबीआई को केस की जांच सौंपी। करीब तीन महीने के बाद 14 फरवरी 2014 को सीबीआई ने केस अपने हाथ में लिया। जांच के दौरान अतुल्य चक्रवर्ती के घर के पास स्थित नाले में मानव कंकाल बरामद हुुआ। जोर-शोर से हल्ला मचा कि ये कंकाल नवारुणा का है। डीएनए टेस्ट के लिए सीबीआई के अफसर अतुल्य चक्रवर्ती का खून भी ले गए। मुजफ्फरपुर के सीबीआई स्पेशल कोर्ट में फारेंसिक रिपोर्ट भी सौंपी जा चुकी है। अतुल्य का कहना है कि ‘‘अगर वो मेरी बेटी का कंकाल है तो सीबीआई को हमें बताना चाहिए ताकि हम उसका अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन मेरा विश्वास है कि मेरी बेटी जिंदा है।’’

सीबीआई ने कोर्ट से केस को हल करने के लिए अक्टूबर 2016 तक का समय लिया था। मामला नहीं हल हुआ तो एजेंसी ने मार्च 2017 तक का एक्सटेंसन लिया। 13 अप्रैल के अपने आवेदन में सीबीआई ने प्रगति रिपोर्ट दाखिल करते हुए सितम्बर तक का समय मांगा है जो मिल गया है। प्रगति रिपोर्ट के अनुसार तीन साल की जांच के दरम्यान सीबीआई ने तीन संदिग्ध लागों का ब्रेन मैपिंग किया है जबकि एक अन्य का नार्को टेस्ट करना बाकी है जिसमें, जांच एजेन्सी के अनुसार, ‘‘चार महीने का समय लगेगा क्योंकि देश में एकमात्र नार्को टेस्ट का लैब अहमदाबाद में है जहाॅं वेटिंग लिस्ट का लंबी कतार है।’’

 बहरहाल, सीबीआई सूत्रों की मानें तो इस सनसनीखेज और नाजुक कांड का सूत्रधार काफी शातिर है। हर राजनीतिक दल के ओहदेदार लोगों के साथ इस ‘शुद्ध शाकाहारी’ शख्श की बैठकी होती है। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के पास भी इसकी पुरजोर पहुंच है। सूत्रधार को रामचरित मानस तथा गीता का पाठ भी कठंस्थ है। मधुमय भोजपुरी गीतों का भी ये शौकीन है। स्वंय गायक भी है। शहर के लोग-बाग को आशंका है इस ‘चतुर सुजान’ आपराधिक जहन वाले शख्श का बाल भी बांका नहीं होगा। लेकिन जांच से जुड़े एक अध्यात्मिक अधिकारी का दावा है कि इसबार यह चिड़ीमार भेड़िया कानून के लंबे हाथ से नहीं बचेगा।
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