2020

बिहार में अमिताभ बच्चन समेत 7 पर परिवाद दर्ज, जानें क्या है पूरा मामला

Court

भंसाली समेत चार फिल्मी हस्तियों की कोर्ट में लगी हाजिरी

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की साजिश के आरोप में दर्ज पुनरीक्षण वाद पर गुरुवार को एडीजे वन के कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपित फिल्मकार संजय लीला भंसाली, एकता कपूर, भूषण कुमार व साजिद नाडियावाल के अधिवक्ता कोर्ट में उपस्थित हुए। भंसाली की ओर से अधिवक्ता सरोज कुमार व शेष तीनों फिल्मकारों की ओर से प्रियरंजन उर्फ अन्नू कोर्ट में उपस्थित हुए। भंसाली की ओर से पहली बार अधिवक्ता उपस्थित हुए हैं।

कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तिथि निर्धारित की है। पूर्व में अनुपस्थिति को लेकर फिल्मकारों को नोटिस किया गया था। बीते 14 अगस्त को अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने सलमान समेत आठ फिल्मी हस्तियों के खिलाफ जिला व सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण वाद दाखिल किया था। इससे पहले जुलाई में  सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया था। आठ जुलाई को सीजेएम कोर्ट ने घटना को क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए परिवाद को खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ अधिवक्ता ने पुनरीक्षण वाद वाद दाखिल किया था।

धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचाने के आरोप में सिकंदरपुर निवासी आचार्य चंद्रकिशोर पाराशर ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है। इसमें अभिनेता अमिताभ बच्चन, एक टीवी क्विज शो के निर्देशक अरुणेश कुमार, राहुल वर्मा, टीवी चैनल के अध्यक्ष मनजीत सिंह, सीईओ एनपी सिंह व प्रतिभागी बेजवाड़ा विल्सन समेत सात को नामजद किया है। परिवाद पर अगली सुनवाई के लिए तीन दिसंबर की तिथि तय की गई है। यानी इस परिवाद को मुकदमा के रूप में लिया जाए कि नहीं, इसका फैसला 3 दिसंबर को होगा।

आचार्य चंद्रकिशोर पाराशर ने आरोप लगाया है कि शो के दौरान प्रतिभागी से धर्मशास्त्र से संबंधित एक सवाल पूछा गया। सवाल व विकल्प में दिए गए उत्तर आपत्तिजनक थे। इससे धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है।

30 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन ने यह सवाल पूछा था कि 25 दिसंबर 1927 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर के अनुयायियों ने किस धर्मग्रंथ की पर्चियां जलाईं थीं? इसके चार विकल्प दिए गए थे, जिसमें A. विष्णुपुराण, B. भागवत गीता, C. ऋगवेद और D. मनुस्मृति दिया गया था।

इसी प्रश्न को लेकर वादी चंद्रकिशोर परासर का परिवाद में कहना है कि जान बूझकर हिंदू भावना का ठेस पहुंचाने के लिए शो में इस तरह का प्रश्न सेट किया गया। इससे हिंदू भावना को आघात पहुंचता है।

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