महाशिवरात्रि पर गरीबनाथ धाम से निकलेगी भोले बाबा की बारात, तैयारियों को लेकर हुई बैठक

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महाशिवरात्रि पर गरीबनाथ धाम से निकलेगी भोले बाबा की बारात,

                                    तैयारियों को लेकर हुई बैठक

महाशिवरात्रि पर्व करीब आते ही शिव भक्तों में उल्लास दिखने लगा है। एक मार्च को महाशिवरात्रि पर बाबा गरीबनाथ मंदिर से निकलने वाली शिव बारात की तैयारी में लोग लग गए हैं। जिसको लेकर मुज़फ़्फ़रपुर शहर के रामभजन बाजार, गोला रोड स्थित झांकी सज्जा स्थल बारात घर में शनिवार को शिव बारात की तैयारी को लेकर भक्तों की बैठक हुई।‌ अध्यक्षता झांकी संयोजक समाजसेवी केदारनाथ प्रसाद ने की।

बैठक के बाद उन्होंने बताया की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए शिव बारात शाम की बजाय दिन में ही करीब 11 से 12 बजे निकाली जाएगी। जो संध्या 5 बजे तक बाबा गरीबनाथ मंदिर वापस लौट आएगी। अगले साल से भी भव्य होगा झाँकी का दृश्य। झांकी की विशेषता होगी की इसमें बाबा के पांच आकर्षक स्वरूपों का दर्शन होगा।  इसमें शिव विवाह दृश्य, महाकाल दर्शन दृश्य, नटराज नृत्य अवस्था की दृश्य, जटा से गंगा बहने जैसी दृश्य और हिमालय पर तपशवी शिव जीवन दृश्य शामिल है।

बाबा गरीबनाथ का इतिहास

 वैसे तो भारत में शिव के कई मंदिर हैं. लेकिन इनमें से कुछ ही ऐ से हैं जहां भगवान भोलेनाथ अपने परिवार के संग विराजमान हैं. इसके अलावा कुछ ही ऐसे मंदिर हैं जिसका इतिहास पुराना है. दरअसर गरीबनाथ धाम का इतिहास बहुत पुराना है. शिव के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव पूरे परिवार के साथ विराजते हैं.

बाबा गरीबनाथ मंदिर की कथा

इस समय जिस स्थान पर जहां बाबा गरीबनाथ का मंदिर है, उस जमीन के मालिक ने आर्थिक तंगी की वजह से अपनी जमीन किसी जमींदार के हाथ बेच दी. उस जमीन पर एक बरगद का पेड़ था. जिसे जमीन के मालिक ने मजदूर को बुलाकर कटवाना शुरू कर दिया. इस दौरान पेड़ से खून जैसा तरल पदार्थ रिसने लगा. इसके बाद जामीनदार ने आगे के काम पर रोक लगा दी. कहते हैं कि उसी दिन रात में जमीनदार को सपने में शिव के दर्शन हुए. सपने में भगवान शिव ने जमीनदार से कहा कि उस स्थान पर उनकी स्थापना करवाए. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि चूंकि इस मंदिर की खोज गरीब मजदूर द्वारा हुई इसलिए गरीबनाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध हुए.

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